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बिना भवन मालिक की लिखित अनुमति के बिल्डिंग पर कुछ भी लिखा या चिपकाया तो लगेगा जुर्माना

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ग्‍वालियर 12 अक्‍टूवर 2023,  चुनाव प्रचार के लिए किसी भी संपत्ति पर भवन स्वामी की बिना लिखित अनुमति के यदि कुछ भी लिखा या पैम्फलेट आदि चिपकाया गया। तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अक्षय कुमार सिंह ने मध्य प्रदेश संपत्ति विरूपण अधिनियम के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।

आदेश में स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान विभिन्न राजनैतिक दल या चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थी या विज्ञापन कम्पनियां किसी भी शासकीय अशासकीय संपत्ति को संबधित विभाग या भवन स्वामी की अनुमति के बिना विरूपित करना प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही सम्पत्ति को स्याही, खड़िया रंग या किसी अन्य पदार्थ से लिखकर या चिह्नित करके विरूपित करना दंडनीय होगा। ऐसा करने पर एक हजार रुपए तक का जुर्माना किया जाएगा।

नगरीय निकाय की अनुमति भी लेनी होगी-चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को निजी भवनों पर भी भवन स्वामी की लिखत सहमति और नगर निगम/स्थानीय निकाय की अनापत्ति लेनी होगी। इसके बाद ही वे झंडे, पोस्टर, बैनर, अस्थाई फ्लेक्स बोर्ड लगा सकेंगे और दीवार लेखन कर सकेंगे। इसके लिए जरूरी होगा कि प्रत्याशी को तीन दिवस के अंदर नगर निगम द्वारा जारी की गई एनओसी के लिए जमा की गई राशि की रसीद भवन स्वामी द्वारा लिए जाने वाले किराए की रसीद और लिखावट पर किए गए व्यय की रसीद निर्धारित प्रोफार्मा में संलग्न कर रिटर्निंग ऑफिसर को प्रस्तुत करना होगा। उक्त झंडे, बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स इत्यादि पर कोई भी ऐसी बात नहीं लिखी जा सकेगी जो विभिन्न समुदायों में रोष उत्पन्न करता हो और लोक शांति भंग होती हो।

जिला दंडाधिकारी ने मप्र संपत्ति विरूपण अधिनियम के तहत जारी किया आदेश

शा. संपत्ति को मूल स्वरूप में लाने के लिए दल गठित-शासकीय विरूपित संपत्ति को पुन: मूल स्वरूप में लाने के लिए दल गठित किए हैं। इन दलों में संबंधित अनुविभागीय दंडाधिकारी, नगर पुलिस अधीक्षक, बीएसएनएल के क्षेत्रीय एसडीओ, विद्युत वितरण कंपनी के सहायक यंत्री, नगर निगम/नगर पालिका के क्षेत्रीय अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के उपयंत्री मय कर्मचारियों तथा संबंधित जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को शामिल किया गया है। सरकारी संपत्ति को मूल स्वरूप में लाने पर हुई व्यय की वसूली दोषी व्यक्ति से भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह वसूल की जाए। साथ ही संबंधित पुलिस थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाएगी। ग्रामीण क्षेत्र में व्यय की प्रतिपूर्ति पंचायत सचिव के द्वारा मूलभूत की राशि से की जाएगी।

 

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